इन्सानीअत का कत्ल सरेआम हो रहा है ,
अभी चुप्प रहो तुम, अवाम सो रहा है ।
हो धरम या सियासत बस एक ही कहानी
हाथों मैं छुरी ले के राम राम हो रहा है ।
हर बात अदाकारी क्या खूब राजनीती
कानून बनाने का, शायद काम हो रहा है ।
घर से तो चाहे निकलो, पर उस तरफ न जाना
भगवान सो रहे हैं ,आराम हो रहा है ।
बारूद की महक चारों तरफ है फैली
''काफ़र'' को उडाने का ताम झाम हो रहा है ।
अभी चुप रहो तुम ,अवाम सो रहा है ,अवाम सो रहा है ।
-------------------(गुरप्रीत काफर )
अभी चुप्प रहो तुम, अवाम सो रहा है ।
हो धरम या सियासत बस एक ही कहानी
हाथों मैं छुरी ले के राम राम हो रहा है ।
हर बात अदाकारी क्या खूब राजनीती
कानून बनाने का, शायद काम हो रहा है ।
घर से तो चाहे निकलो, पर उस तरफ न जाना
भगवान सो रहे हैं ,आराम हो रहा है ।
बारूद की महक चारों तरफ है फैली
''काफ़र'' को उडाने का ताम झाम हो रहा है ।
अभी चुप रहो तुम ,अवाम सो रहा है ,अवाम सो रहा है ।
-------------------(गुरप्रीत काफर )