Sunday, 3 February 2013

इन्सानीअत का कत्ल सरेआम हो रहा है ,
अभी चुप्प रहो तुम, अवाम सो रहा है ।

हो धरम या सियासत बस एक ही कहानी 
हाथों मैं छुरी ले के राम राम हो रहा है ।

हर बात अदाकारी क्या खूब राजनीती 
कानून बनाने का, शायद काम हो रहा है ।

घर से तो चाहे निकलो, पर उस तरफ न जाना 
भगवान सो रहे हैं ,आराम हो रहा है ।

बारूद की महक चारों तरफ है फैली
''काफ़र'' को उडाने का ताम झाम हो रहा है ।
अभी चुप रहो तुम ,अवाम सो रहा है ,अवाम सो रहा है ।
-------------------(गुरप्रीत काफर )